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Friday, 5 February 2016

पापा जिन्दा है

@ 2016 बस यादेँ सिर्फ यादेँ................ 

पापा जिन्दा है,
अमर है मेरे खून में
मेरे शरीर के लाल तिलो में,
मेरे माथे की लकीरो में,
मेरे गले के रुद्राक्ष में,
मेरी आवाज में,
मेरी सोच में,
मेरे शरारतो में,
मेरी स्मृतियों के आँगन में,
मेरी उम्र के हर वर्षगांठ में,
मेरे भाइयो में,
मेरी बुआ की टँगी रखियो में,
मेरे चाचा की खामोश नजरो में,
मेरी अम्मा की अथाह ममता में,
पापा अमर है....

नितिश श्रीवास्तव
उ०प्र०, इलाहाबाद

मै रहूँ ना रहूँ

@ 2016 बस यादेँ सिर्फ यादेँ..................
मैं रहूँ या न रहूँ,
मेरा पता रह जाएगा,
शाख़ पर यदि एक भी पत्ता हरा रह जाएगा,
बो रहा हूँ बीज कुछ सम्वेदनाओं के यहाँ,
ख़ुश्बुओं का इक अनोखा सिलसिला रह
जाएगा,
अपने गीतों को सियासत की ज़ुबां से दूर रख,
पँखुरी के वक्ष में काँटा गड़ा रह जाएगा,
मैं भी दरिया हूँ मगर सागर मेरी मन्ज़िल नहीं,
मैं भी सागर हो गया तो मेरा क्या रह
जाएगा,
कल बिखर जाऊँगा हरसूँ मैं भी शबनम की तरह,
किरणें चुन लेंगी मुझे जग खोजता रह जाएगा..............

:::::::::::: नितिश श्रीवास्तव :::::::::::

Thursday, 4 February 2016

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना था मना

@ 2016 बस यादेँ सिर्फ यादेँ.................... 
जिन मुश्किलों में मुस्कुराना था मना,
उन मुश्किलों में मुस्कुराते हम रहे,
जिन रास्तों की थी नहीं मंजिल कोई,
उन रास्तों पे हम मगर चलते रहे,
जिस दर्द को दरकार थी आंसुओं की,
उस दर्द में आंसू हमारे ना बहे,
जो ख़्वाब रूठे थे हमारी जिंदगी से,
वो ख़्वाब आँखों में मगर पलते रहे,
मुंह मोड़ के रिश्ते हमारे चल पड़े,
यादों में उनकी हम मगर जीते रहे,
आते रहे तूफ़ान हमको लीलने को,
हम मगर लहरों के संग लड़ते रहे.................

::::::::: नितिश श्रीवास्तव ::::::::

Wednesday, 4 December 2013

मैं याद आऔंगा










@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
मैं याद आऔंगा 
जब तन्हा राहों पे जाओगे 
जितने कदम तुम उठाओगे 
कभी दरख्तों की छाओ में
सोचो मुझे सर्द सी आहों में
आँखों से जब मेरा इंतेज़ार बहाओगे
में याद आऔंगा 
जाओ जो तुम सपनो के सफर में,
जागोगे जो महकी सेहेर में
कुछ केहते केहते जो तुम खो जाओगे
मैं याद आऔंगा
मन पुकारे तुझे संग
छुपी हेई तेरे दिल में ऐसी कोई धुन
चुपके से कोई भी सरगोश हो
जागो तो फिर भी खामोश हो
ना होगा कोई पास इक होगी आस
याद आयेगी वो बात थामो जो कोई हाथ
मैं याद आओंगा
जब दिल से तुम मुस्कुराओगे
जो याद आओं तो अश्‍क़ कैसे फिर रोक पाओगे
में याद आऔंगा ...................................................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव ::::::::::

मैं अकेला तो नहीं था















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
मैं अकेला तो नहीं था,
अब कैसे हो गया?
मानो सब कुछ एक पल मैं खो गया,
ज़िंदगी की हकीकत सामने आई,
सब भ्रम मिट गया,
सच्चाई छाई..
क्यूं मान रहा था खुद को सबसे सुखी?
उस गुरूर के सामने अब नज़रें झुकी, 
अब चैन बस तब ही मिल सकता है,
मिट जायें इश्स दिल की डाइयरी के पन्ने सभी..
उस शोर की तो मानो मंज़िल ही ढह गयी,
अब तो बस अकेलापन अछा लगता है..
वो हंसी, वो शोर..अब हमे कहाँ जाचता है?
काश! क्यूं ना हम पहले से ही अकेले होते
क्यूं ये बोझ झूठी यादों का धोते..
ना आये अब यहाँ कोई और
मैं देखना चाहता हु अब दुनिया का छोर
इश्स दुख के लिये
खुदा मैने क्यूं वो सब सुख साहा? ? ?
मैं अकेला तो नहीं था
अब कैसे हो गया? ? ?
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::

एक पल आया था















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
एक पल आया था
जब लगा मुझे
कह दूं कि
मेरे हाथों में
ये बैसाखियाँ
मेरी नहीं हैं
पर मैं झूठ नहीं बोल पाया
फिर लगा कह दूं कि
इन बैसाखियों से
कोई फ़र्क नहीं पड़ता
मैं इनसे कभी नहीं हारा
पर मैं झूठ नहीं बोल पाया
चाहता था तुम्हें कहना कि
मेरे हाथ थाम सकते हैं
तुम्हारे कोमल हाथों को
किन्तु सच तो ये था
कि मेरे हाथ बंधे थे
उन बैसाखियों से
जो किसी और की नहीं
बल्कि मेरी अपनी ही थीं
मैं झूठ नहीं बोल पाया
इस तरह वो पल आया
एक पल ठहरा, बह गया
और मैं तन्हा रह गया
तुम्हारी यादों के साथ
लिये बैसाखियां हाथ
मुझे याद है जीवन ने
एक गीत मधुर गाया था
हाँ, वो एक पल आया था............................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::

जलाई जो तुमने


















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
जलाई जो तुमने-
है ज्योति अंतस्तल में ,
जीवन भर उसको
जलाए रखूंगा
तन में तिमिर कोई
आये न फिर से,
ज्योतिर्मय मन को
बनाए रखूंगा.
आंधी इसे उडाये नहीं
घर कोइ जलाए नहीं
सबसे सुरक्षित
छिपाए रखूंगा.
चाहे झंझावात हो,
या झमकती बरसात हो
छप्पर अटूट एक
छवाए रखूंगा
दिल-दीया टूटे नहीं,
प्रेम घी घटे नहीं,
स्नेह सिक्त बत्ती
बनाए रक्खूँगा.
मैं पूजता नो उसको ,
पूजे दुनिया जिसको ,
पर, घर में इष्ट देवी
बिठाए रखूंगा.......................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव ::::::::::