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Wednesday, 4 December 2013

मैं अकेला तो नहीं था















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
मैं अकेला तो नहीं था,
अब कैसे हो गया?
मानो सब कुछ एक पल मैं खो गया,
ज़िंदगी की हकीकत सामने आई,
सब भ्रम मिट गया,
सच्चाई छाई..
क्यूं मान रहा था खुद को सबसे सुखी?
उस गुरूर के सामने अब नज़रें झुकी, 
अब चैन बस तब ही मिल सकता है,
मिट जायें इश्स दिल की डाइयरी के पन्ने सभी..
उस शोर की तो मानो मंज़िल ही ढह गयी,
अब तो बस अकेलापन अछा लगता है..
वो हंसी, वो शोर..अब हमे कहाँ जाचता है?
काश! क्यूं ना हम पहले से ही अकेले होते
क्यूं ये बोझ झूठी यादों का धोते..
ना आये अब यहाँ कोई और
मैं देखना चाहता हु अब दुनिया का छोर
इश्स दुख के लिये
खुदा मैने क्यूं वो सब सुख साहा? ? ?
मैं अकेला तो नहीं था
अब कैसे हो गया? ? ?
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::

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