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Friday, 5 February 2016

पापा जिन्दा है

@ 2016 बस यादेँ सिर्फ यादेँ................ 

पापा जिन्दा है,
अमर है मेरे खून में
मेरे शरीर के लाल तिलो में,
मेरे माथे की लकीरो में,
मेरे गले के रुद्राक्ष में,
मेरी आवाज में,
मेरी सोच में,
मेरे शरारतो में,
मेरी स्मृतियों के आँगन में,
मेरी उम्र के हर वर्षगांठ में,
मेरे भाइयो में,
मेरी बुआ की टँगी रखियो में,
मेरे चाचा की खामोश नजरो में,
मेरी अम्मा की अथाह ममता में,
पापा अमर है....

नितिश श्रीवास्तव
उ०प्र०, इलाहाबाद

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (06-02-2016) को "घिर आए हैं ख्वाब" (चर्चा अंक-2244) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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