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Wednesday, 3 July 2013

अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई,

















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई,
मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई.
आप मत पूछिये क्या हम पे सफर में गुजरी,
थे लुटेरों का जहां गाव, वहीं रात हुई.
ज़िंदगी भर तो हुई गुफ्तगू गैरों से मगर,
आज तक हमसे हमारी ना मुलाकात हुई.
हर गलत मोड पे टोका है किसी ने मुझको,
एक आवाज़ तेरी जब से मेरे साथ हुई.
मैने सोचा की मेरे देश की हालत क्या है,
एक कातिल से तभी मेरी मुलाकात हुई......................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

7 comments:

  1. बहुत उम्दा ग़ज़ल लिखी है आपने!
    बधाई हो...!

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 04/07/2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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  3. बहुत सुंदर गजल , शुभकामनाये

    यहाँ भी पधारे
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_3.html

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  4. बहुत सुन्दर ..कितना कुछ कह दिया ... शब्दों में.

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