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Thursday, 22 August 2013

बस लुटाटा रहा हूँ लिया कुछ नहीं
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
बस लुटाटा रहा हूँ लिया कुछ नहीं,
आप कहते है मैने किया कुछ नहीं,
कि प्यार की बात होने से क्या फायदा,
और अब मुलाकात होने से क्या फायदा,
और टूट के जब घरा आज बंजर हुई,
तब ये बरसात होने से क्या फायदा,
कैसे मानू की सब कुछ है संसार में,
मैने ढूढा बहुत पर मिला कुछ नहीं,
कि रूप है इस सिरे प्रेम है उस सिरे,
और कोई सपनो कि गलियो मे कब तक फिरे,
और मन के आकाश मे दुख के बादल घिरे,
ओ सिर्फ कागज पे दो बूँद आँसू गिरे,
चाहता है मुझे तो समझ जायेगा,
मैने खत मे तो वैसे लिखा कुछ नहीं,
कि तेरे हक मे नहीं फैसला है तो क्या,
गम मिला है तो क्या दिल जला है तो क्या,
अब तो चुपचाप ही सिर्फ रहता हूँ मै,
आपसे ही यही बात कहता हूँ मै,
हाले दिल भी बताना नही ठीक है,
कोई पूछे तो कहदो हुआ कुछ नहीं,
कि रात कुछ इस तरह से बिताता हूँ मै,
नींद लगती है तो जाग जाता हूँ मै,
और सिर्फ तुमको ही हरदम सुनाता हूँ मै,
और बंद होठो से जब गीत गाता हूँ मै,
मैने तुमसे तो वैसे बहुत कुछ कहा,
ये अलग है कि तुमने सुना कुछ नहीं,
बस लुटाटा रहा हूँ लिया कुछ नहीं.................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

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