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Monday, 3 June 2013

एक कवि की कविता है वो

एक कवि की कविता है 
वो रस,छन्द,अलंकार से भरी महिमा है 
वो कभी कहती है तो कभी रूठती है तो कभी मनाती है 
वोशांत निर्मल सी वो मुझे लगती है हसती है तो दिल मुस्कुराता है
कवि की रूपहली उज्ज्वल सुहास है 
वो कविता की बानगी,अजब निराली प्यारी लड़की 
को कविता लिख के कविता गाके कविता-कविता करता हू
कविता,कविता,कविता और कविता….….




7 comments:

  1. आप लिखते रहिए..!
    लोग आपको पहचानने लगेंगे!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (05-06-2013) के "योगदान" चर्चा मंचःअंक-1266 पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत खूब वाह प्रेम का सुंदर अहसास


    आग्रह है
    गुलमोहर------

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  4. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं संजय भास्कर हार्दिक स्वागत करता हूँ.

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  5. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

    संजय भास्‍कर
    शब्दों की मुस्कुराहट
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  6. बहुत बहुत धन्यवाद संजय भास्कर जी आप सब का बहुत बहुत आभारी हु ...................

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