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Wednesday, 5 June 2013

मैं कहाँ लिखता हु















@ 2009 बस यादें सिर्फ यादें ...................
मैं कहाँ लिखता हु ,
लिखते तो है अलफ़ाज़ मेरे,
मायने ढूद ही लेते है,
जर्रा नवाज मेरे,
लाल स्याही के लिए हमने निचोड़ा खुदको,
दिल के टुकड़े भी चीख के दे रहे आवाज़ मेरे,
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::






5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    एक कवि की कविता है वो
    यह पोस्ट कहाँ गई आपकी
    ये मैसेज आ रहा है।
    Sorry, the page you were looking for in this blog does not exist.
    कृपया इसे लगाइए ना।
    चर्चा मंच पर लोग शिकायत कर रहे हैं।
    --

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  2. अपने ब्लॉग को हमारी वाणी से भी जोड़ दीजिए।
    ज्यादा लोग पढ़ेंगे और कमेंट भी आयेंगे।

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  3. http://hamarivani.com/
    यहाँ अपना एकाउंट बना लीजिए।

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहस्पतिवार (06-06-2013) को साहित्य में प्रदूषण ( चर्चा - 1267 ) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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