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Tuesday, 1 October 2013

कभी ऐसा लगता है,
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
कभी ऐसा लगता है,
दिल में एक राज़ है,
जिसे कहना चाहूँ,
पर मैं कह पाऊँ ना,
आँखों ही आँखों में कह जाती है,
जो ये खामोशियों की ये कैसी ज़ुबां,
मैंने सुना जो ना उसने कहा,
क्या ऐसा ही होता है प्यार,
मेरे खुदा मुझे इतना बता,
क्या ऐसा ही होता है प्यार,
कभी ऐसा लगता है,
अनजानी प्यास है
पर सिमटी होठों में वो रह पाए ना,
कैसा एहसास है कोई तो पास है,
ये दूरियां हैं फिर कैसी यहाँ,
महकी लगे क्यों सारी फिज़ा,
क्या ऐसा ही होता है.
ये सच है चाहत पे कभी,
किसी का भी ज़ोर नहीं,
दिलबर की यादों को बांधे,
ऐसी कोई डोर नहीं,
सब कुछ वही पर लगता नहीं,
क्या ऐसा ही होता है,
इक पल जो मिल जाए दिल को,
चला जाए दूर कहीं,
दुनिया में इस दिल के जैसा,
कोई मजबूर नहीं,
मैंने सुना प्यार करता जहां,
प्यार ऐसा भी होता है.................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (01-10-2013) मंगलवारीय चर्चा 1400 --एक सुखद यादगार में "मयंक का कोना" पर भी है!
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. bahut pyari si prasturi.........shandaar

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