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Friday, 18 October 2013

वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी
मुझसे बाते करनेको हरपल तरसती थी
कब रात होंगी कब समय आयेगा
ये घडी देख देख के पागल होती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी...
तुम थी बहोत दूर लेकिन रोज मेरा इन्तेजार
करती थी
मेरा इन्तेजार करते करते तुम्हारी आँखे
बरसती थी
मै तो नहीं मेरी याद ही लेके
गुनगुनाते हुवे सपनोंमे खो जाती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी..
घंटो फ़ोन पे बाते करते रोज नये गीत गाती थी
रात रात भर प्यारी बातें सुनती थी और
सुनती थी
जबतक नींद न आजाये अपनी आवाज़ ही न
खो जाये
बिना थके जगती और मुझे भी जगती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी..
वो दिन कितने खुबसूरत और राते कितनी हसीन
थी
वो बातें कितनी प्यारी वो पल कितने जवां थे
तेरी आवाज़ हरपल सुनने को तब मेरी भी सांसे
रुकती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी...
वो तुम्हारी प्यारी बातें कितने हसीन थे वो दिन
और रातें
रोज रोज तुम इक अच्छी कविता सुनती थी
और वो सुनाते सुनाते मुझे भी शायर बनाती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी...
कभी अपना दुःख कभी दूसरोंके सुख मुझे
बताया कराती थी
कभी अपने लिए तो कभी दूसरों के लिए
बात बात में रोया कराती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी..
कभी हम सोये तो हमें जगाती थी
कभी हम रोये तो हमे मनाती थी
हमारा इक इक कहेना दिल से मानती थी
हमे रोज न भूलके sms या call किया करती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी...
हम शायर नही थे तुमने हमे बनाया
हम आशिक नही थे तुमने हमे बनाया
मेरी जिंदगी में तुम्हारे जैसी इक ही तो मशहूर
हस्ती थी
जिसमे मेरा दिल... मेरी जान..
मेरी आत्मा बसती थी
वो क्या था जब तुम मेरे लिए हंसती थी...........................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

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