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Friday, 18 October 2013

आज हमारी बीती यादें हमें बहुत सताती है,















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
आज हमारी बीती यादें हमें बहुत सताती है,
दिन का चैन रातों की नींदें हमारी लूट जाती है.
एक दिन वो भी था जब माता लोरी हमें सुनाती थी,
भूख लगी रोता देख दूध भी हमें पिलाती थी.
दफ्तर से पापा घर लौटे बाहों में मुझे खिलाते थे,
समय मिलते ही मुझको वे झूले में झुलाते थे.
समय बिता स्कूल गए हम किताबें हमने खूब पढ़ी,
खेल-कूद सब यादें बन गयी माता लोरी भूल गयी.
डिग्री और डिप्लोमा लेकर नौकरी की तलाश रही,
नौकरी मिलते ही मुझको पैसे की खूब चाह रही.
एक दिन याद आता है जब एक लड़की मेरे पास खड़ी,
यादें बनके रह गया वो दिन प्यार हुआ और बात बढ़ी.
शादी हुयी बर्बाद हुआ में सपने बड़े संजोये थे,
सपनों की दुनिया में खोकर बीते पल ही अच्छे थे..................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव ::::::::::::

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