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Saturday, 12 October 2013

कब तक तू ऐ मन डरता रहेगा ?















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
कब तक तू ऐ मन डरता रहेगा ?
पकड़कर बांह किसी की चलता रहेगा,
कब तक ?
आखिर कब तक ?
कभी तो देख निकलकर बाहर,
कभी तो चल अपने दम पर,
कभी तो टकरा मुसीबतों से अकेले ,
यूँ पथ पर अकेले
आखिर कब तक
अकेले पथ पर आखिर कब तक चलता रहेगा ,
डरकर इस दुनियां से,
यू हीं जीता रहेगा
सोच आखिर कब तक ?
अब क्योकि तू नहीं रहा लिए नन्हा छुटपन
बड़ा हो गया है तू ,
इसलिए....सोच....
लड़ हर विपदा से,
खुद कर फैसला अपने जीवन का ,
तब कही भय दूर होगा भीतर तेरे बैठे मन का
वक्त रहते सोच वरना फिर पछतायेगा .....................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - रविवार - 13/10/2013 को किसानी को बलिदान करने की एक शासकीय साजिश.... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः34 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  2. बहुत सुन्दर .
    नई पोस्ट : रावण जलता नहीं
    नई पोस्ट : प्रिय प्रवासी बिसरा गया
    विजयादशमी की शुभकामनाएँ .

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  3. bahut sundar prastuti hai..
    mere blog par bhi aapka swagat hai..
    ek baar awashy padharen..
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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