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Saturday, 12 October 2013

कानों में घंटी की आवाज़ फिर गूँज उठेगी ,















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
कानों में घंटी की आवाज़ फिर गूँज उठेगी ,
टीचर की प्यार भरी डांट जैसे कानों को छू कर निकलेगी .
हँसीं के ठहाके , 
फिर थोड़ी सी शरारत ,
दोस्त की प्यार भरी मुस्कान , 
फिर थोड़ी सी नज़ाकत .
संजोयी हैं यादें यहाँ कितनी सारी ,
जाने ज़िन्दगी कब उड़ चली .
स्कूल की हर याद जैसे दिल के भीतर बस जायगी ,
याद आएंगे ये पल , याद आएगी ये दुनिया .
आँखों के समक्ष हर पल की धुंधली तस्वीर लौट आएगी ,
कानों में जैसे हर लफ्ज़ की झंकार सुनाई पड़ जायगी .
मैडम के प्यार , आशीर्वाद के लिए लम्हे तरस जायेंगे ,
दोस्तों की एक झलक के लिए ,
आँखें नम हो जायंगी .
प्यार की मज़बूत डोर बंध जायगी ,
यादों की डोलियाँ जो हमारे संग जाएँगी ,
जब स्कूल के जीवन की गतिविधि पूरी होगी….
चल पड़ेंगे हम अपनी नयी दुनिया बसाने ,
ख़्वाबों के नए दीप जलाने .
सपनों की नयी आस जगेगी ,
यादों की वही डोली सजेगी .
थिरक जायेंगे कदम नयी धुन पर ,
ठहर जाएगी हवा नयी सरगम पर .
खिलेंगे नए फूल इस गुलशन में ,
नयी कलियों की महक आँगन में बहेगी ,
जब स्कूल के जीवन की गतिविधि पूरी होगी….......................

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