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Friday, 18 October 2013

ख्वाबों की दुनिया सजाकर,















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ........................
ख्वाबों की दुनिया सजाकर,
धोखे बहुत खाये हैं.
तभी एक आवाज आई,
सोच में अब क्यों पड़ा है.
जिंदगी के रास्ते में,
सोचना अभी और भी है.
कर्म की राहों पर चल ले,
रास्ते अभी और भी हैं.
दूर नजरें क्यों गड़ाये ,
दुनिया चमकती रेत सी है.
पास जाकर देख उसको,
यह चमक भी खोखली है.
एक रास्ता बंद हुआ तो,
दूसरा अभी और भी है.
कर्म की राहों पर चल ले,
रास्ते अभी और भी है.
कमल भी कीचड़ में खिलता,
देख उसको तू बदल जा.
कोयले की खान में भी,
हीरे की तलाश कर जा.
क्या हुआ जो न मिला तो,
एक हीरा और भी है.
कर्म की राहों पर चल ले,
रास्ते अभी और भी है.
ऊँचाइयों से खफा है क्यों,
बाट चल ले ये बटोही.
तू निगाहें यूँ गड़ा ले,
नजर आये राह तेरी.
दोराहा पे खड़ा तो क्या,
एक रास्ता और भी है.
कर्म की राहों पर चल ले ,
रास्ते अभी और भी है.
जिंदगी के मोड़ टेढ़े,
चल संभलकर ये बटोही .
कर्म करके राह बना ले,
यह राह आसान होगी.
ले शपथ तू आज से ही,
कर्म ही तेरी जिंदगी है.
कर्म की राहों पर चल ले,
रास्ते अभी और भी है.
क्यों भटकता मन है तेरा,
ख़्वाबों के आंसू क्यों छलकते.
इस दुनिया से बाहर आकर,
एक दुनिया फिर बसा ले.
एक अकेला तू नहीं है,
दुनिया में कई और भी है.
कर्म की राहों पर चल ले,
रास्ते अभी और भी है.....................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव ::::::::::::

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